Programming Language in Hindi : प्रोग्रामिंग लैंग्वेज क्या है? विशेषताएं और फायदे

Programming Language in Hindi प्रोग्रामिंग लैंग्वेज क्या है विशेषताएं और फायदे

इंसान को दूसरे इंसान से कम्यूनिकेट करने के लिए लैंग्वेज का उपयोग किया जाता है। ठीक वैसे ही कंप्यूटर के साथ कम्यूनिकेट करने के लिए भी लैंग्वेज का इस्तेमाल किया जाता है, जिसे प्रोग्रामिंग लैंग्वेज (Programming Language in hindi) कहा जाता है। कंप्यूटर के अलावा मोबाइल और टैबलेट में भी जो कुछ भी आप देख सकते हैं वह भी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के माध्यम से प्रोग्रामिंग किया गया होता है। किसी भी एप्लिकेशन, वेबसाइट या सॉफ्टवेयर को बनाने के लिए भी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का हीं उपयोग किया जाता है।

प्रोग्रामिंग लैंग्वेज क्या है? (Programming Language in Hindi)

प्रोग्रामिंग लैंग्वेज एक कंप्यूटर की हीं लैंग्वेज है जिसके जरिए प्रोग्रामर कंप्यूटर से कम्यूनिकेट करता है। कंप्यूटर के जरिए आज हम बहुत सारे काम आसानी से और जल्दी से कर सकते हैं। लेकिन किसी भी कार्य को करने के लिए कंप्यूटर को निर्देश दिया जाता है और उसी के जरिए कंप्यूटर काम करता है। कंप्यूटर को निर्देश प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के माध्यम से हीं दिए जाते हैं। प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को कंप्यूटर प्रोग्रामिंग या कोडींग के रूप में भी जाना जाता है।

कंप्यूटर से कम्यूनिकेट करने के लिए प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को इंसानों द्वारा बनाया गया है, इसलिए इसे कृत्रिम लैंग्वेज भी कहां जाता है। किसी भी विशिष्ट कार्य को करने के लिए प्रोग्रामिंग लैंग्वेज लिखा जाता है और कंम्पयूटर फिर उसी तरह कार्य करता। पाइथन, JavaScript, PHP, C, Java इत्यादि प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के उदाहरण है। सभी कंम्पयूटर प्रोग्राम और सॉफ्टवेयर लिखने के लिए प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का उपयोग किया जाता है।

प्रोग्रामिंग लैंग्वेज की विशेषताएं ( Features of Programming Language in Hindi)

• सिंटैक्स : सभी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का अपना सिंटैक्स होता है जिसमें सहीं कोड लिखने के नियम और स्ट्रक्चर शामिल होता है। सिंटैक्स की मदद से स्टेटमेंट और निर्देशों को फॉर्मेट और किया जा सकता है।

• डाटा का प्रकार : प्रोग्रामिंग लैंग्वेज विभिन्न तरह के डाटा का प्रतिनिधित्व करती है।

• वेरिएबल और मेमोरी मैनेजमेंट : वेरिएबल एक प्रोग्राम में डाटा के लिए प्लेसहॉल्डर के रूप में कार्य करते हैं। मेमोरी लुक से बचने के लिए मेमोरी मैनेजमेंट जरुरी है।

• कंट्रोल स्ट्रक्चर : लूप (उदाहरण: For, While) और कंडिशनल स्टेटमेंट (If-Else, Switch) जैसे कंट्रोल स्ट्रक्चर प्रोग्रामर को प्रोग्राम नियंत्रित करने में मदद करता है। जिससे प्रोग्राम फ्लेक्सिबल और पावरफुल बन जाते हैं।

• फंक्शन/मैथड : फंक्शन या मैथड प्रोग्रामर को जटिल काम को आसान, मैनेजेबल युनिट्स में परिवर्तित करने के लिए मदद करता है।

प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का इतिहास (Programming Language History in Hindi)

प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को सबसे पहले Ada Lovelace द्वारा 1843 में लिखा गया था। उन्होंने एनालिटिकल इंजन का उपयोग करके तैयार किया गया था। एडा लवलेस ने चार्ल्स बैबेज के लिए इसे तैयार किया था। हालांकि पहली वास्तविक प्रोग्रामिंग लैंग्वेज 1950 के दशक में FORTRAN के नाम से विकसित की गई थी। जिसका उपयोग वैज्ञानिक और इंजीनियर कैलकुलेशन के लिए किया जाता था। 1960 के दशक में COBOL, BASIC और ALGOL जैसी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज विकसित की गई।

ऑपरेटिंग सिस्टम और एप्लिकेशन लिखने के लिए सी और पास्कल जैसी लैंग्वेज को 1970 के दशक में विकसित किया गया। 1980 के दशक में स्मॉलटॉक, 1990 के दशक में पर्ल और पाइथन, 2000 के दशक में रूबी और PHP जैसी लैंग्वेज का विकास हुआ।

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प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के प्रकार (Types of Programming Language in Hindi)

प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को दो प्रकार में बांटा गया है 1) लो लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज और 2) हाई लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज

• लो लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज : इस प्रकार की लैंग्वेज को हार्डवेयर के लेवल का माना जाता है। इसे समझना बहुत मुश्किल होता है। यह लैंग्वेज सभी कंम्पयूटर में Run नहीं हो पाती। इस लैंग्वेज का प्रोग्राम काफी तेज एक्जीक्यूट होता है। लो लैंग्वेज प्रोग्रामिंग को दो प्रकार में बांटा गया है। a) मशीन लैंग्वेज और b) असेंबली लैंग्वेज

1. मशीन लैंग्वेज : इस लैंग्वेज को सिर्फ कंप्यूटर हीं समझ सकता है। इस लैंग्वेज में सिर्फ बाइनरी यानी 0 से 1 अंकों का हीं प्रयोग होता है। यह एक ऐसी भाषा है जिसे कंप्यूटर बिना किसी टेक्नोलॉजी के समझ लेता है। शुरूआत में कंप्यूटर के लिए प्रोग्राम लिखने के लिए मशीन लैंग्वेज का हीं इस्तेमाल किया जाता था। इस लैंग्वेज में लिखे गए प्रोग्राम में गलती होने पर उसे ढूंढना और ठीक कर पाना काफी मुश्किल है।

2. असेंबली लैंग्वेज : मशीन लैंग्वेज की कमी को दूर करने के लिए असेंबली लैंग्वेज विकसित की गई। इस लैंग्वेज में अक्षर और चिन्हों का इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए इसे Symbol लैंग्वेज भी कहां जाता है। इसे समझना और याद रखना बहुत आसान है।इसका उपयोग माइक्रोप्रोसेसर पर आधारित डिवाइस में और रियल टाइम सिस्टम में किया जाता है। इस लैंग्वेज में प्रोग्राम को मोडिफाइ करना आसान होता है।

• हाई लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज : इस लैंग्वेज में अक्षर, संख्या और चिन्हों का उपयोग किया जाता है। लो लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के विपरित इस लैंग्वेज को इंसानों द्वारा समझना आसान होता है वहीं कंप्यूटर के लिए कठिन होता है। इसलिए हाई लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को कंप्यूटर के लिए आसान बनाने के लिए compiler या interpreter की मदद से मशीन लैंग्वेज में परिवर्तित किया जाता है। JavaScript, C, Java, पाइथन, पास्कल और FORTRAN हाई लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है।

प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का Course किसे  करना चाहिए? (Who should do programming language in Hindi)

प्रोग्रामिंग लैंग्वेज सीखने के लिए पूर्व अनुभव या किसी खास कौशल की आवश्यकता नहीं है। इसे हर कोई सीख सकता है। प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का उपयोग अब हर क्षेत्र में किया जाता है। इसे सीखने के बाद आईटी कंपनियों में नौकरी की संभावना बढ़ जाती है। सिर्फ प्राइवेट हीं नहीं सरकारी संगठनों में भी प्रोग्रामर की आवश्यकता रहती है।

प्रोग्रामिंग लैंग्वेज कैसे सीखें (How to Learn Programming Language in Hindi)

प्रोग्रामिंग लैंग्वेज सीखने के लिए सरकार मान्य संस्थान या फिर ऑनलाइन ट्यूटोरियल की भी मदद ले सकते हैं। अगर कोई छात्र प्रोग्रामिंग लैंग्वेज सीखना चाहते हैं तो वे कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग और BCE की डिग्री कर सकते हैं। सबसे पहले आप पाइथन या JavaScript सीख सकते हैं क्योंकि C या Java की तुलना में यह लैंग्वेज काफी आसान है। प्रोग्रामिंग लैंग्वेज सीखने से पहले उसके मूल सिद्धांतो को समझना जरूरी है।

अगर आप प्रोग्रामिंग लैंग्वेज ऑनलाइन सीखना चाहते हैं तो Udemy, Datacamp, Coursera, LinkedIn Learning, GeeksforGeeks की मदद से सीख सकते हैं। इसके अलावा YouTube पर भी आपको प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के की सारे ट्यूटोरियल मिल सकते हैं।

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निष्कर्ष

आज हम किसी भी काम को आसानी से और जल्दी से करने के लिए कंप्यूटर का इस्तेमाल करते हैं, लिए कंप्यूटर अपने आप किसी भी काम को नहीं कर पाता है। इसके लिए कंप्यूटर को निर्देश देने पड़ते हैं और यह निर्देश हम प्रोग्रामिंग लैंग्वेज (Programming Language in Hindi) के माध्यम से हीं दे सकते है। ऐसे में आप अंदाजा लगा सकते हैं की प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का महत्त्व क्या है और कितना है। अगर आप भी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज सिख के कंप्यूटर IT फील्ड में अपना कैरियर बनाना चाहते तोह आज ही पटना का सबसे सर्वोतम Computer Training इंस्टिट्यूट BCIT WORLD में आज ही अपना डेमो फिक्स करे ।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. प्रोग्रामिंग लैंग्वेज से आप क्या समझते हैं?

प्रोग्रामिंग लैंग्वेज एक ऐसी लैंग्वेज है जिसके जरिए हम कंप्यूटर से कम्यूनिकेट कर पाते हैं। कंप्यूटर को किसी काम को करने के लिए दिशा-निर्देश दिए जाते हैं और यह दिशा-निर्देश प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के माध्यम से हीं दिए जाते हैं। ऐसे में कंप्यूटर को समझने के लिए प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को समझना जरूरी है।

Q2. प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का Course करने के फायदे क्या है?

कंप्यूटर से कम्यूनिकेट करने के लिए कंप्यूटर कोर्स सीखना जरूरी है। इतना ही नहीं आज सिर्फ प्राइवेट कंपनियों में हीं नहीं सरकारी कंपनियों में भी प्रोग्रामिंग के लिए नौकरी के स्कोप रहते हैं ऐसे में यह कोर्स सीखने से अच्छी नौकरी के चांस बढ़ जाते हैं।

Q3. प्रोग्रामिंग लैंग्वेज सीखने में कितना टाइम लगता है?

 प्रोग्रामिंग लैंग्वेज सीखने का समय आप किसी संस्थान से कर रहे हैं उस पर निर्भर करता है। आमतौर पर आप प्रोग्रामिंग लैंग्वेज 6 महीने से लेकर 1 साल में सीख सकते हैं।

Q4. प्रोग्रामिंग लैंग्वेज कितने प्रकार की होती है?

 प्रोग्रामिंग लैंग्वेज दो प्रकार की होती है 1) लो लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज और 2) हाई लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेज।

Q5. सबसे आसान प्रोग्रामिंग लैंग्वेज कौन सी है?

C या Java की तुलना में पाइथन या JavaScript ज्यादा आसान प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है।

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